उन्नाव। शहर के मोहल्ला आदर्श नगर स्थित सुशील कुमार बाजपेई के आवास पर आयोजित श्रीमद् भागवत सप्ताह ज्ञान यज्ञ के पंचम दिवस भागवताचार्य पं. सतीश त्रिपाठी जी ने भगवान की मृदुलता और करुणा का वर्णन करते हुए कहा कि भगवान का स्वभाव कितना मृदुल है, भगवान अपने भक्त के अवगुणों पर ध्यान नहीं देते हैं।
उन्होंने पूतना चरित्र का वर्णन करते हुए बताया कि पूतना नाम की राक्षसी भगवान बालकृष्ण को मारने के लिए अपने स्तनों में कालकूट नामक विष लगाकर गई। उसने भगवान को गोद में लेकर स्तनपान कराया। परमात्मा ने विष युक्त स्तनपान कर उसे परमधाम बैकुंठ भेज दिया। धन्य है परमात्मा की करुणा, रुधिर-मांस खाने वाली, असाधवी, बालघातिनी, हत्यारिन पूतना को भी भगवान ने माता की गति प्रदान कर दी। यह मेरे परमात्मा का स्वभाव है।
आगे भगवान के बाल चरित्रों की चर्चा करते हुए उन्होंने बताया कि भगवान ने पांच तत्वों को शुद्ध करने का काम किया। मिट्टी खाकर पृथ्वी तत्व को, जंगल की दावाग्नि का पान कर अग्नि तत्व को, कालिया नाग को नाथ कर जल तत्व को, व्योमासुर को मारकर आकाश तत्व को एवं तृणावर्त को मारकर वायु तत्व को शुद्ध किया।
भगवान ने अपने भक्तों का सदैव मान बढ़ाया है और अभिमानियों का मान घटाया है। इंद्र का अभिमान चूर करने के लिए सात वर्ष के कन्हैया ने सात कोस के गिरिराज पर्वत को सात दिन सात रात तक अपनी उंगली पर धारण कर बृजवासियों की रक्षा की और इंद्र का मान मर्दन किया।
भगवान किसी का अहंकार नहीं रखते, अहंकार तो भगवान का भोजन है।नगर के गणमान्य श्रोताओं से पंडाल खचाखच भरा रहा। मंगलमय भजनों से श्रोता मंत्रमुग्ध हो गए। व्यवस्थापक सतीश बाजपेई, अंकित पांडेय व प्रखर बाजपेई ने आए हुए श्रद्धालुओं का आभार व्यक्त किया। कथा के उपरांत प्रसाद वितरण हुआ।
